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सब केहू के प्रणाम,

आखिर इ का हो रहल बा राष्ट्रपति के चुनाव के नाव पर? एह गरिमामयी पोस्ट के आ तथाकथित गैर राजनितिक पद पर अईसन राजनीति? बुझाता जे इ महामिम के चुनाव नईखे होत, बल्कि राजनितिक क्षत्रप लोग के कुस्ती हो रहल बा. नेता लोग के जिद्द, राजनितिक महत्वाकांक्षा, किंग मेकर बने के आपाधापी, राजनितिक शत्रुता/मित्रता के भंवर में फंसल राष्ट्रपति चुनाव, कवनो महामिम के संवैधानिक पद से सुसोभित करे के बजाय कवनो एम् एल सी, भा राज्य सभा के सांसद के चुनाव बुझात बा. का एह तरह के राजनीतक उठापठक एह गरिमामयी पद के गरिमा के प्रभावत ना करी? का जब कन्सेंसस ना हो के किंग मेकर के द्वारा स्थापित प्रेसिडेंट निष्पक्ष रह पईहन? का एह तरह के गैर कार्यकारी लेकिन अति महत्वपूर्ण सर्वोच्च संवैधानिक पद खातिर कवनो एगो अईसन गैर राजनितिक, अविवादित उम्मीदवार के सर्वसम्मति से चुनाव नईखे कईल जा सकत? अभी कंही पढ़ात रहनी हाँ भारत के प्रथम राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में. चुनाव ओहू बेर भईल रहे, लेकिन बहुमत के आदर तब के प्रधानमन्त्री के भी करे के पडल आ डाक्टर बाबू राजेंदर प्रसाद के भी कवनो पद के चाह ना रहे. दरअसल नेहरु जी के पसंद सी राजगोपालाचारी जी रान्ही लेकिन बल्लभ भाई पटेल आ अधिकाँश लोग के पसंद राजेंदर बाबू रंही. तब एह बाबत नेहरु जी राजेंदर बाबू से मिल के पूछनी की का रउवा राष्ट्रपति के उम्मीदवार होखल चाहत बानी? राजिंदर बाबू के जवाब रहे की हमनी गांधीवादी हईं जा आ हमनी के कवनो पद के चाह ना रहे. तब नेहरू जी कहानी की रउवा इ लिखित में दे सकत बानी, तब राजिंदर बाबू लिख के भी दे देहनी. बाद में पटेल जी के कहला बुझला से आ अधिकाँश लोग के इक्षा के मद्देनजर ना नेहरु जी ही राजगोपालाचारी के नाम के आगे कईनी और राजेंदर बाबू भी प्रत्यासी बने के तैयार हो गईनी.

एह इक्कीसवीं सदी में, भौतिकवादी युग में हमनी के राजनीति कवानी दिशा में जा रहल बा कहल मुश्किल बा.


जय भोजपुरी

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असल मेँ कठपुतली के तलाश हो रहल बा । योग्यता , अनुभव , बिद्वता के फेर मेँ के बा ? प्रणाम आ जय भोजपुरी ।

उमेश भाई प्रणाम,
बिलकुल सही कहत बानी, राजनीति खालिस शतरंज के बिसात हो गईल बा जेइमे खाली आ खाली शह आ मात के खेला रह गईल बा, एइमे में ना कवनो आदर्श बांचल बा, ना कवनो जनभावना आ समाज सेवा. बहुत बहुत धन्यवाद राउर टिपण्णी खातिर.

जय भोजपुरी

jai bhojpuri bhai ji|

umesh bhai sahi kahat bani kathputali ke talash ho rahal ba |

 Abdul Kalam ummedwar baran ki naheen?

Hamara tabe ee election men interest ba, nahee to koi kath ke putla ke President banave log hamra kuchho kahe ke naikhe.

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